पंचकल्याणक के तीसरे दिन उमड़ा जन सैलाब
भगवान नेमिनाथ संसार को त्याग लेंगे दीक्षा आज
पंचकल्याणक के तीसरे दिन उमड़ा जन सैलाब
सिवनी। दीक्षा एक घटना है जो अंतर्मुखी के व्यक्ति के जीवन में घटती है संसार और सन्यास में से दीक्षार्थी सन्यास को चुनता है। यहीं से साधना की शुरूआत होती है। मन, वाणी और काया को साधना ही सबसे बडी साधना है। भोगी भौतिकता में आनंद लेता है जबकि योगी आध्यात्मिक/ आत्मध्यान में आनंद लेता है। इस आध्यात्मिक आनंद को पाने के लिए योग साधना की जरूरत है और यह योग साधना निग्र्रन्थता के बिना संभव नहीं है। उक्त उद्गार श्री 1008 मज्जिनेन्द्र नेमिनाथ जिनबिम्ब पंचकल्याणक एवं वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव व विश्व शांति महायज्ञ के अवसर पर मुनि श्री आदित्यसागर ने व्यक्त किये।
दीक्षा कल्याणक के अवसर पर भगवान नेमीनाथ का राजुल से विवाह के लिए बारात निकलना और राजुल के द्वार पर पहुंचकर अचानक वापस होना और दीक्षा के लिए निकलना जैसे घटनाऐं लोगों को प्रभावित करती है। इस दौरान सौधर्म इंद्र कुबेर यज्ञनायक सहित सभी इंद्रो के द्वारा प्रभु की जय जयकार करना निश्चित ही पृथ्वी की एक अनुपम घटना थी।
कार्यक्रम में प्रतिदिन बाहर से आये हुए धर्म प्रेमी बंधुओं की संख्या निरंतर बढ़ रही है। वहीं प्रतिष्ठाचार्य द्वारा मूतियों में धार्मिक क्रियाओं के माध्यम से प्रतिष्ठित किया जा रहा है। इस अवसर पर विजय कुमार, अंजली जैन, शिखर जी वाले द्वारा एक दिवसीय भोज की व्यवस्था की गई। आयोजन को लेकर सुदर्शन बाझल ने बताया कि कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि गण एवं नगर के लोग भी महाराज श्री की मंगलवाणी का लाभ लेगें।


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